मैं चकित हो उठती हूँ सोच
आखिर वह कौन सी शक्ति है
आखिर वह कौन सी शक्ति है
जो अविवेकी बातों पर विश्वास
करने का कारण बनती है|
दिलाती है एह्साह
और तुम उससे कोई
दिलाती है एह्साह
और तुम उससे कोई
प्रेरणा पाकर
जुट जाते हो ....साहस जुटाते हो
नियति को भी बदल देते हो
जाते हो उद्यत ....
गुत्थियों को हल करते जाते हो ,
कौन जाने यह अतार्किक है
या फिर सोचा समझा उपक्रम
या फिर सोचा समझा उपक्रम
यह तो एक रहस्य ..
पर हम सब करते है एक विश्वाश
किसी न किसी पर
एक अनोखा, अजीब
जिसे हम शायद कह सकते है
अँधा विश्वाश |
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Blind Faith
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