Tuesday, August 16, 2011

स्वतंत्र, मुक्त परन्तु कैद


स्वतंत्रता यानि सब  बंधनों से मुक्ति...
हर तरफ उन्मुक्त हो विचरना 
और सिंह की तरह दहाड़ना..
पक्षी की तरह गगन में 
निर्बाध उड़ते रहना.... 
इक खुशहाल परिवेश में 
मदमस्त हो चलना फिरना 
और कीड़ा कौतुक करते जाना ...

हर कोई गढ़ लेता है
 स्वतंत्रता की  दार्शनिकता भरी 
 अपनी अपनी परिभाषा 
अपने लिहाज से मनमांगी,
 मनमाफिक स्वतंत्रता के अर्थ ....
मगर हम तो रह गए हैं 
बस एक कैदी ,एक गुलाम 
आत्मघोषित स्वतंत्रता के ...
अपनी अंतहीन इच्छाओं के ...
जो पल प्रतिपल जनमती हैं 
हमारे दिमागों में और
 बनाती रहती हैं हमें 
आत्मकेंद्रित, अमानवीय चाहों -
सुख सुविधाओं का गुलाम ...
हम भूलते जानते हैं जन गण मन के 
दुःख दर्द और दारुण  यातनाओं को 
बस हो  रहते  केवल मशगूल 
स्वार्थभरी चाहनाओं में ....

बस दूसरों के सामने दिखावों के 
हम हो जाते हैं वशीभूत ..
प्रदर्शन  और बनावटीपन के नित नए 
प्रतिमानों  ,पद और प्रतिष्ठा के दिखावे ...
तब भी दावे से कहते हैं हम हैं स्वतंत्र,
बंधनों  और मजबूरियों से मुक्त.. 

हमारी रक्त धमनियां में है आवेग 
झूठे मद और अहंकार का 
दूसरों की  खुशियाँ तनिक भी
 नहीं भाती हमें ....
भले माथे पर पड़ता हो बल और 
 दुत्कारती हो  हमारी नैतिकता 

नए चलन और फैशन 
अपने छुपे तरीकों से 
बिगाड़ते हमारी अस्मिता 
नित प्रदूषित कर रहे 
हमारी अभिव्यक्ति और दृष्टि को 
संदूषित  करते हमारे उत्सवों- 
राज पथ के परेडों को..
फिर भी चहुँ ओर विराजती 
 गुलामी  पर होते रहते हैं 
हम हमेशा गर्वित ....
हम लालच से भी कहाँ मुक्त हो पाए?
अथाह संपत्ति, धन लोलुपता को 
लपलपाती हमारी जीभें,दुलराती दुमें 
झूठें यश वैभव के प्रदर्शन को 
 बेताब हमारी नस्लें..
न कोई पश्चाताप न ही आत्म मंथन 
जाहिर है ,हम हैं 
सर्वथा स्वतंत्र और मुक्त कैदीजन! 
_______________________________________________________________
Independent, Free but SLAVES
http://jyotimi.blogspot.com/2011/08/independent-free-but-slaves.html
_________________________________________________________________

Share/Bookmark

22 comments:

  1. सच्चाई से रुबुरु करती हुई रचना आभार .......

    ReplyDelete
  2. very nice dear...
    www.pksharma1.blogspot.com
    ek baar aao

    ReplyDelete
  3. Hello there!
    I'm very happy that you've begun writing in Hindi also. Now... what I wonder is whether you've translated this from 'it's' English version or it is just as spontaneous as it's sister post in your English blog. Anyways, I like your efforts and see that you are fully capable of translating your emotions and words in more than one medium, with great skill and ease.

    ReplyDelete
  4. सुंदर कविता ज्योति जी बधाई और शुभकामनाएं

    ReplyDelete
  5. अपनी बनायी दीवारों के कैदी।

    ReplyDelete
  6. मौलिक विचारों की सशक्त अभिव्यक्ति ...याद रहेगी यह कविता...

    ReplyDelete
  7. समाज को आइना दिखाती प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  8. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति!!

    ReplyDelete
  9. हमारी रक्त धमनियां में है आवेग
    झूठे मद और अहंकार का
    दूसरों की खुशियाँ तनिक भी
    नहीं भाती हमें ....
    भले माथे पर पड़ता हो बल और
    दुत्कारती हो हमारी नैतिकता

    bahut hi utkrasht shabdavali ka prayag .......thanks jyotiji.

    ReplyDelete
  10. kavita lambi leking khubsurat hai....bandan mukt hona aasan nahi..hone me bhi kai bandan...silsila jaari rahta ahi...

    ReplyDelete
  11. वाकई स्वतंत्रता को समग्र रूप से नहीं अपनाया है हमने.

    ReplyDelete
  12. नमस्कार....
    बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
    मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
    आपका ब्लागर मित्र
    नीलकमल वैष्णव "अनिश"

    इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

    1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

    2- BINDAAS_BAATEN: रक्तदान ...... नीलकमल वैष्णव

    3- http://neelkamal5545.blogspot.com

    ReplyDelete
  13. कुछ गहरे प्रश्न खड़े करती है आपकी रचना ... स्वतंत्रता का मतलब क्या है ... शायद स्वतंत्र भारत अभी भी खोज रहा है ...

    ReplyDelete
  14. बहुत खूब ! हिंदी में भी आप बहुत अच्छा लिखती हैं. शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  15. तुम्हारा सच में जवाब नहीं मैं तुम्हें और तुम्हारी लेखनी को सलाम करती हूँ इतनी छोटी सी उम्र में इतना सुन्दर वाह क्या लिखा है हर शब्द सच्चाई बयाँ करता हुआ |बहुत - बहुत शुभकामनायें |

    ReplyDelete
  16. कमाल की गहन अभिव्यक्ति है,ज्योति जी आपकी.
    आप उम्र से छोटी जरूर हैं और मेरी बिटिया समान हैं,
    परन्तु आपके विचारों की गहराई और समझ की ऊँचाई
    मुझे मजबूर कर रहें है कि मैं आपको 'जी' कहकर ही पुकारूँ.
    मुझे आप पर गर्व है.

    आपके सुन्दर विचार मेरी नई पोस्ट पर भी अपेक्षित है.

    ReplyDelete
  17. नज़रिया बदलते ही परिभाषायें बदल जाती हैं, सुन्दर रचना!

    ReplyDelete
  18. स्वतंत्रता यानि सब बंधनों से मुक्ति...
    मदमस्त हो चलना फिरना
    और कीड़ा कौतुक करते जाना ...

    मगर हम तो रह गए हैं
    बस एक कैदी ,एक गुलाम
    आत्मघोषित स्वतंत्रता के ...

    हमारी रक्त धमनियां में है आवेग
    झूठे मद और अहंकार का
    झूठें यश वैभव के प्रदर्शन को

    बेताब हमारी नस्लें..
    न कोई पश्चाताप न ही आत्म मंथन
    जाहिर है ,हम हैं
    सर्वथा स्वतंत्र और मुक्त कैदीजन!

    Bahut acchhi rachna.. Badhai..

    ReplyDelete